छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी होने के साथ ही शहर रायपुर की अपनी खासियत भी है। मसलन यह शहर औद्योगिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से एक बेहद समृद्ध नगर है। कभी यह दक्षिण कोसल की राजधानी था। एक शहर के रूप मेंं इसका इतिहास 9 वीं शताब्दी से ज्ञात है। कलचुरि राजा सिंहन (सन् 1255-1375ईं.) के शासन् के बाद रतनपुर राजवंश दो शाखाओं मेंं विभक्त हो गया। ज्येष्ठ शाखा रतनपुर मेंं शासन करती रही जबकि कनिष्ठ शाखा ने सन् 1375 मेंं एक पृथक राज्य की स्थापना की जिसकी राजधानी रायपुर थी। रायपुर मेंं कलचुरियों के दो शिलालेख हैं जो इस समय क्रमश: नागपुर तथा रायपुर के संग्रहालयों मेंं सुरक्षित हैं। पहला ब्रह्मदेव का रायपुर प्रस्तर लेख है जो इस समय नागपुर के केन्द्रीय संग्रहालय मेंं सुरक्षित है। दूसरा हरिब्रह्मदेव का खल्लारी प्रस्तर लेख है और इस समय रायपुर संग्रहालय मेंं सुरक्षित है। इन शिलालेखों मेंं कलचुरि राजा ब्रह्मदेव के शासन का उल्लेख है और उन पर क्रमश: विक्रम संवत 1458(1401-02ई.) तथा विक्रम संवत 1470 (1413-14ई) अंकित है। इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि ब्रह्मदेव ने रायपुर मेंं सन् 1402-1414 ई. तक राज्य किया। 1830 मेंं एक ब्रिटिश कर्नल ने रायपुर का विस्तार कर नया हिस्सा बसाया था। कुछ बंगले आज भी उस दौर की याद दिलाते हैं।
रायपुर शहर को कभी तालाबों का शहर कहा जाता था। उस समय यहां छोटे बड़े करीब 130 तालाब थे, किंतु आज यहां एक ही महत्वपूर्ण तालाब है। लगभग 600 वर्ष पुराने इस तालाब को बूढ़ा तालाब कहते हैं। यह ऐतिहासिक तालाब यहां के लोगों की आस्था से भी जुड़ा है। बूढ़ा तालाब, यह शहर का सबसे बड़ा तालाब है जिसे स्वामी विवेकानंद सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, इस तालाब के बीचोबीच एक छोटे से द्वीप पर उद्यान है। शहर के अन्य दर्शनीय स्थलों मेंं महामाया मंदिर, शिवमंदिर, रामकृष्ण मिशन एवं दूधधारी मठ है, दूधधारी मंदिर हिन्दूओं के आराध्य भगवान राम का करीब 500 साल पुराना मंदिर है। रायपुर मेंं एक विशाल मंदिर शदाणी दरबार सिंधी समाज का मंदिर है, यह मंदिर संत सद्गुरू स्वामी शादराय पीठ के रूप मेंं स्थापित है। रायपुर के दर्शनीय स्थानों मेंं से एक है महंत घासीदास संग्रहालय। इसका नाम सतनामी संप्रदाय के संस्थापक गुरु घासीदास के नाम पर रखा है। इस राजकीय संग्रहालय मेंं पाषाण युग के औजार, मंदिर द्वारपालों की प्राचीन मूर्तियां, भूमि स्पर्श मुद्रा मेंं भगवान बुद्ध की प्रतिमा दर्शनीय हैं। रायपुर के पर्यटन स्थलों मेंं नगरघड़ी है। राजीव गाँधी ऊर्जा पार्क जो एक नागरिक वन है, यहाँ के अन्य दर्शनीय स्थल हैं। यहाँ सभी झूले सौर ऊर्जा से संचालित हैं।
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रायपुर शहर को कभी तालाबों का शहर कहा जाता था। उस समय यहां छोटे बड़े करीब 130 तालाब थे, किंतु आज यहां एक ही महत्वपूर्ण तालाब है। लगभग 600 वर्ष पुराने इस तालाब को बूढ़ा तालाब कहते हैं। यह ऐतिहासिक तालाब यहां के लोगों की आस्था से भी जुड़ा है। बूढ़ा तालाब, यह शहर का सबसे बड़ा तालाब है जिसे स्वामी विवेकानंद सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, इस तालाब के बीचोबीच एक छोटे से द्वीप पर उद्यान है। शहर के अन्य दर्शनीय स्थलों मेंं महामाया मंदिर, शिवमंदिर, रामकृष्ण मिशन एवं दूधधारी मठ है, दूधधारी मंदिर हिन्दूओं के आराध्य भगवान राम का करीब 500 साल पुराना मंदिर है। रायपुर मेंं एक विशाल मंदिर शदाणी दरबार सिंधी समाज का मंदिर है, यह मंदिर संत सद्गुरू स्वामी शादराय पीठ के रूप मेंं स्थापित है। रायपुर के दर्शनीय स्थानों मेंं से एक है महंत घासीदास संग्रहालय। इसका नाम सतनामी संप्रदाय के संस्थापक गुरु घासीदास के नाम पर रखा है। इस राजकीय संग्रहालय मेंं पाषाण युग के औजार, मंदिर द्वारपालों की प्राचीन मूर्तियां, भूमि स्पर्श मुद्रा मेंं भगवान बुद्ध की प्रतिमा दर्शनीय हैं। रायपुर के पर्यटन स्थलों मेंं नगरघड़ी है। राजीव गाँधी ऊर्जा पार्क जो एक नागरिक वन है, यहाँ के अन्य दर्शनीय स्थल हैं। यहाँ सभी झूले सौर ऊर्जा से संचालित हैं।
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