संतान नष्ट होने या संतान ना होने को विभिन्न तरह के शाप के परिणाम ऋषि पाराशरजी ने बताया है। ऋषि पाराशर जी ने उल्लेेख किया है कि भगवान शंकर ने स्वयं पार्वती जी को यह उपाय बताए हैं।
1. सर्प का शाप :
बहुत सारे योगों से सर्प शाप का पता चलता है। उनमेंं राहु पर अधिक बल दिया गया है। कुल आठ योग बताए गए हैं। सर्प शाप से संतान नष्ट होने पर या संतान का अभाव होने पर स्वर्ण की एक नाग प्रतिमा बनाकर विधिपूर्वक पूजा की जाए जिसमेंं अनुष्ठान, दशंाश हवन, मार्जन, तर्पण, ब्राह्मण भोजन कराके गोदान, भूमि दान, तिल दान, स्वर्ण दान इत्यादि किए जाएं तो नागराज प्रसन्न होकर कुल की वृद्धि करते हैं।
2. पितृ शाप :
गतजन्म मेंं पिता के प्रति किए गए अपराध से जो शाप मिलता है तो संतान का अभाव होता है। इस दोष का पता सूर्य से संबंधित योगों से चलता है और सूर्य के पीडि़त होने या कुपित होने पर ये योग आधारित हैं। अष्टम स्थान में राहु या अष्टमेश राहु से पापाक्रांत हो तो इसी को पितृ दोष या पितर शाप भी कहा गया है। कुल मिलाकर ग्यारह योग हैं।
उपाय : पितृश्राद्ध करना चाहिए तथा जितने अधिक ब्राह्मणों को भोजन करा सकें, कराएं। यदि कन्या हो तो गाय का दान और कन्या दान करना चाहिए। ऐसे करने से कुल की वृद्धि होगी।
3. मातृ शाप :
पंचमेंश और चंद्रमा के संबंधों पर आधारित यह योग संतान का नष्ट होना या संतान का अभाव बताते हैं। इन योगों मेंं निश्चित रूप से मंगल, शनि और राहु का योगदान मिलेगा। यह दोष कुल 13 मिलाकर हंै। इस जन्म मेंं भी यदि कोई माता की अवहेलना करेगा या पीडि़त करेगा तो अगले जन्म मेंं यह दोष देखने को मिलेगा।
4. भ्रातृ शाप :
यदि गतजन्म मेंं भाई के प्रति कोई अपराध किया गया हो तो उसके शाप के कारण इस जन्म मेंं संतान नष्ट होना या संतान का अभाव मिलता है। पंचम भाव, मंगल और राहु से यह दोष देखे जाते हैं। यह दोष कुल मिलाकर तेरह हैं।
उपाय: हरिवंश पुराण का श्रवण करें, चान्द्रायण व्रत करें, पवित्र नदियों के किनारे शालिग्राम के सामने पीपल वृक्ष उगाएं तथा पूजन करें, पत्नी के हाथ से गाय या चांदी की गाय-बछिया का दान करें और फलदार वृक्षों सहित भूमि का दान करें तो निश्चित रूप से कुल वृद्धि होती है।
5. मामा का शाप :
गतजन्म मेंं यदि मामा के प्रति कोई अपराध किया गया हो तो उसके शाप से संतान का अभाव इस जन्म मेंं देखने को मिलता है। यदि ऐसा होता है कि पंचम भाव मेंं बुध, गुरू, मंगल और राहु मिलते हैं और लग्न मेंं शनि मिलते हैं। इस योग मेंं शनि-बुध का विशेष योगदान होता है।
उपाय : भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना, तालाब, बावड़ी, कुअंा और बांध को बनवाने से कुल की वृद्धि होती है।
6. ब्रह्म शाप : गतजन्म मेंं कोई धन या बल के मद मेंं ब्राह्मणों का अपमान करता है तो उसके शाप से इस जन्म मेंं संतान का अभाव होता है या संतान नष्ट होती है। यह कुल मिलाकर सात योग हैं। नवम भाव, गुरू, राहु और पाप ग्रहों को लेकर यह योग देखने को मिलते हैं। योग का निर्णय तो विद्वान ज्योतिषी ही करेंगे परंतु उपाय निम्न बताए गए हैं।
उपाय: पितृ शांति, प्रायश्चित करके गोदान, दक्षिणा, स्वर्ण और पंचरत्न तथा अधिकतम ब्राह्मणों को भोजन कराएं तो शाप से निवृत्ति होकर कुल की वृद्धि होती है।
7. पत्नी का शाप :
गतजन्म मेंं पत्नी के द्वारा यदि शाप मिलता है तो इस जन्म मेंं संतान का अभाव होता है। यह ग्यारह योग बताए गए हैं जो सप्तम भाव और उस पर पापग्रहों के प्रभाव से देखे जाते हैं।
उपाय: कन्या दान श्रेष्ठ उपाय बताया गया है। यदि कन्या नहीं हो तो स्वर्ण की लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति तथा ऐसी गाय जो बछड़े वाली माँ हों तथा शैया, आभूषण, वस्त्र इत्यादि ब्राह्मण जोड़े को देने से पुत्र होता है और कुल वृद्धि होती है।
8. प्रेत शाप :
यह नौ योग बताए गए हैं जिनमेंं ये वर्णन है कि अगर श्राद्ध का अधिकारी अपने मृत पितरों का श्राद्ध नहीं करता तो वह अगले जन्म मेंं अपुत्र हो जाता है। इस दोष की निवृत्ति के लिए निम्न उपाय हैं।
उपाय : पितृश्राद्ध, रूद्राभिषेक, ब्रह्मा की स्वर्णमय मूर्ति, गाय, चांदी का पात्र तथा नीलमणि दान करना चाहिए।
9. ग्रह दोष :
यदि ग्रह दोष से संतान हानि हो तो बुध और शुक्र के दोष मेंं भगवान शंकर का पूजन, गुरू और चंद्र के दोष मेंं संतान गोपाल का पाठ, यंत्र और औषधि का सेवन, राहु के दोष से कन्या
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1. सर्प का शाप :
बहुत सारे योगों से सर्प शाप का पता चलता है। उनमेंं राहु पर अधिक बल दिया गया है। कुल आठ योग बताए गए हैं। सर्प शाप से संतान नष्ट होने पर या संतान का अभाव होने पर स्वर्ण की एक नाग प्रतिमा बनाकर विधिपूर्वक पूजा की जाए जिसमेंं अनुष्ठान, दशंाश हवन, मार्जन, तर्पण, ब्राह्मण भोजन कराके गोदान, भूमि दान, तिल दान, स्वर्ण दान इत्यादि किए जाएं तो नागराज प्रसन्न होकर कुल की वृद्धि करते हैं।
2. पितृ शाप :
गतजन्म मेंं पिता के प्रति किए गए अपराध से जो शाप मिलता है तो संतान का अभाव होता है। इस दोष का पता सूर्य से संबंधित योगों से चलता है और सूर्य के पीडि़त होने या कुपित होने पर ये योग आधारित हैं। अष्टम स्थान में राहु या अष्टमेश राहु से पापाक्रांत हो तो इसी को पितृ दोष या पितर शाप भी कहा गया है। कुल मिलाकर ग्यारह योग हैं।
उपाय : पितृश्राद्ध करना चाहिए तथा जितने अधिक ब्राह्मणों को भोजन करा सकें, कराएं। यदि कन्या हो तो गाय का दान और कन्या दान करना चाहिए। ऐसे करने से कुल की वृद्धि होगी।
3. मातृ शाप :
पंचमेंश और चंद्रमा के संबंधों पर आधारित यह योग संतान का नष्ट होना या संतान का अभाव बताते हैं। इन योगों मेंं निश्चित रूप से मंगल, शनि और राहु का योगदान मिलेगा। यह दोष कुल 13 मिलाकर हंै। इस जन्म मेंं भी यदि कोई माता की अवहेलना करेगा या पीडि़त करेगा तो अगले जन्म मेंं यह दोष देखने को मिलेगा।
4. भ्रातृ शाप :
यदि गतजन्म मेंं भाई के प्रति कोई अपराध किया गया हो तो उसके शाप के कारण इस जन्म मेंं संतान नष्ट होना या संतान का अभाव मिलता है। पंचम भाव, मंगल और राहु से यह दोष देखे जाते हैं। यह दोष कुल मिलाकर तेरह हैं।
उपाय: हरिवंश पुराण का श्रवण करें, चान्द्रायण व्रत करें, पवित्र नदियों के किनारे शालिग्राम के सामने पीपल वृक्ष उगाएं तथा पूजन करें, पत्नी के हाथ से गाय या चांदी की गाय-बछिया का दान करें और फलदार वृक्षों सहित भूमि का दान करें तो निश्चित रूप से कुल वृद्धि होती है।
5. मामा का शाप :
गतजन्म मेंं यदि मामा के प्रति कोई अपराध किया गया हो तो उसके शाप से संतान का अभाव इस जन्म मेंं देखने को मिलता है। यदि ऐसा होता है कि पंचम भाव मेंं बुध, गुरू, मंगल और राहु मिलते हैं और लग्न मेंं शनि मिलते हैं। इस योग मेंं शनि-बुध का विशेष योगदान होता है।
उपाय : भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना, तालाब, बावड़ी, कुअंा और बांध को बनवाने से कुल की वृद्धि होती है।
6. ब्रह्म शाप : गतजन्म मेंं कोई धन या बल के मद मेंं ब्राह्मणों का अपमान करता है तो उसके शाप से इस जन्म मेंं संतान का अभाव होता है या संतान नष्ट होती है। यह कुल मिलाकर सात योग हैं। नवम भाव, गुरू, राहु और पाप ग्रहों को लेकर यह योग देखने को मिलते हैं। योग का निर्णय तो विद्वान ज्योतिषी ही करेंगे परंतु उपाय निम्न बताए गए हैं।
उपाय: पितृ शांति, प्रायश्चित करके गोदान, दक्षिणा, स्वर्ण और पंचरत्न तथा अधिकतम ब्राह्मणों को भोजन कराएं तो शाप से निवृत्ति होकर कुल की वृद्धि होती है।
7. पत्नी का शाप :
गतजन्म मेंं पत्नी के द्वारा यदि शाप मिलता है तो इस जन्म मेंं संतान का अभाव होता है। यह ग्यारह योग बताए गए हैं जो सप्तम भाव और उस पर पापग्रहों के प्रभाव से देखे जाते हैं।
उपाय: कन्या दान श्रेष्ठ उपाय बताया गया है। यदि कन्या नहीं हो तो स्वर्ण की लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति तथा ऐसी गाय जो बछड़े वाली माँ हों तथा शैया, आभूषण, वस्त्र इत्यादि ब्राह्मण जोड़े को देने से पुत्र होता है और कुल वृद्धि होती है।
8. प्रेत शाप :
यह नौ योग बताए गए हैं जिनमेंं ये वर्णन है कि अगर श्राद्ध का अधिकारी अपने मृत पितरों का श्राद्ध नहीं करता तो वह अगले जन्म मेंं अपुत्र हो जाता है। इस दोष की निवृत्ति के लिए निम्न उपाय हैं।
उपाय : पितृश्राद्ध, रूद्राभिषेक, ब्रह्मा की स्वर्णमय मूर्ति, गाय, चांदी का पात्र तथा नीलमणि दान करना चाहिए।
9. ग्रह दोष :
यदि ग्रह दोष से संतान हानि हो तो बुध और शुक्र के दोष मेंं भगवान शंकर का पूजन, गुरू और चंद्र के दोष मेंं संतान गोपाल का पाठ, यंत्र और औषधि का सेवन, राहु के दोष से कन्या
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